02 फ़रवरी 2011

लघु कथा -समय नया -सोच वही

.........शर्मा जी और सब तो ठीक है बस समीर चाहता है की कनक बाल छोटे करवा ले ...........यू नो .........आज कल के लड़के कैसी पत्नी पसंद करते हैं.''''यह कहकर समीर के मामा जी ने फोन काट दिया .शर्मा जी असमंजस में पड़ गए ...आखिर ये कैसी डिमांड है ? ...शर्मा जी के पास बैठी उनकी पत्नी मिथिलेश बोली ''क्या कह रहे थे भाई साहब ?'' शर्मा जी मुस्कुराते हुए बोले ''मिथिलेश याद है तुम्हें ...शादी से पहले तुम किरण बेदी की तरह के बाल रखती थी और मेरी जिद पर तुमने इन्हें बढा लिया था क्योंकि मैं चाहता था की तुममे लक्ष्मी जी का पूर्ण रूप परिलक्षित हो पर ...........आज देखो हमारा होने वाला दामाद समीर चाहता है की कनक अपने लम्बे बाल कटाकर छोटे करा ले ........कितने अजीब ख्यालात रखती है नयी पीढ़ी !'' मिथिलेश व्यग्य में मुस्कुराते हुए बोली ''नयी हो या पुरानी पीढ़ी .....चलती तो पुरुष की ही है न .जाती हूँ ...कनक को तैयार भी तो करना है बाल छोटे करवाने के लिए ...''

3 टिप्‍पणियां:

शालिनी कौशिक ने कहा…

purush satta par krara vyangy karti laghu katha bahut achchhi lagi .badhai sarthak lekhan hetu .

वन्दना ने कहा…

आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
कल (3/2/2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।
http://charchamanch.uchcharan.com

शरद कोकास ने कहा…

थोड़ी शार्पनेस और चाहिये भाषा में ।