23 जून 2010

स्मृति गीत: हर दिन पिता याद आते हैं... ---संजीव 'सलिल'

स्मृति गीत:
हर दिन पिता याद आते हैं...
संजीव 'सलिल'
*
जान रहे हम अब न मिलेंगे.
यादों में आ, गले लगेंगे.
आँख खुलेगी तो उदास हो-
हम अपने ही हाथ मलेंगे.
पर मिथ्या सपने भाते हैं.
हर दिन पिता याद आते हैं...
*
लाड, डांट, झिडकी, समझाइश.
कर न सकूँ इनकी पैमाइश.
ले पहचान गैर-अपनों को-
कर न दर्द की कभी नुमाइश.
अब न गोद में बिठलाते हैं.
हर दिन पिता याद आते हैं...
*
अक्षर-शब्द सिखाये तुमने.
नित घर-घाट दिखाए तुमने.
जब-जब मन कोशिश कर हारा-
फल साफल्य चखाए तुमने.
पग थमते, कर जुड़ जाते हैं 
हर दिन पिता याद आते हैं...
*
divyanarmada.blogspot.com

1 टिप्पणी:

मुकेश कुमार सिन्हा ने कहा…

पग थमते, कर जुड़ जाते हैं
हर दिन पिता याद आते हैं...

aakhir jisne hame yahan tak pahuchaya, wo yaad to aayega hi........waise mere papa to abhi bhi marg darshak banane ke liye hain.........bhagwan unhe mere liye banaye rakhna.........:)

ek achchhi rachna...