29 जनवरी 2010

पुस्तक समीक्षा से सम्बंधित एक ब्लॉग पुस्तक विमर्श

बहुत दिनों से साध थी कि एक ऐसा ब्लाग शुरू किया जाये जिसके माध्यम से पुस्तकों पर चर्चा की जा सके। इधर देखने में आ रहा है कि युवा पीढ़ी लगातार पढ़ने से और अच्छा साहित्य पढ़ने से बच रही है। इसके पीछे एक कारण तो उनके अभिभावकों, गुरुओं अथवा किसी बुजुर्ग द्वारा पुस्तकों के पाठन को प्रेरित न करना है तो एक दूसरा कारण सही पुस्तकों की जानकारी भी न होना है।
इसे पारिवारिक माहौल ही कहिए कि पढ़ने का शौक बचपन से ही बना रहा और उस पर अच्छा काम यह हुआ कि लिखने की बीमारी लग गई। इस लिखने की और हमेशा अच्छा लिखने की बीमारी ने सदैव पढ़ते रहने को प्रेरित किया।
पढ़ने के साथ पंस्तकों की समीक्षा करना, उन पर शोधपरक आलेख तैयार करने ने समीक्षात्मक और आलोचनात्मक दृष्टि भी प्रदान की। इस कारण से भी पुस्तकों पर समीक्षा की दृष्टि से एक शुरूआत करना चाह रहे थे।
ब्लाग (पुस्तक विमर्श) भी बनाया और पुस्तकों की एक लम्बी सूची भी तैयार कर ली, जिन्हें युवाओं को पढ़ना चाहिए। ऐसी पुस्तकों की भी सूची बनाई जिनके द्वारा समाज में इस समय विमर्श की परम्परा चालू है। इसके बाद भी मन में एक कसमसाहट थी कि कोई ऐसी पुस्तक से शुरूआत की जाये जिसके साथ कुछ अपनत्व भरा जुड़ाव हो।

पुस्तक खोजी जा रही थी किन्तु असफलता ही हाथ लग रही थी। ऐसे असमंजस के क्षणों में हमारे भतीजे दीपक ‘मशाल’ ने सारी समस्या ही सुलझा दी। उसके काव्य-संग्रह ‘अनुभूतियाँ’ का विमोचन हुआ तो लगा कि यही वह पुस्तक है जिसके द्वारा ब्लाग (पुस्तक विमर्श) की शुरूआत की जा सकती है।


बस फिर क्या था पुस्तक की समीक्षा कर डाली और बस आज नहीं कल, आज नहीं कल के साथ दिन निकलते जा रहे थे। इसी आज-कल में आदरणीय निर्मला कपिला जी के ब्लाग वीर बहूटी पर अनुभूतियाँ की समीक्षा देखी। इस समीक्षा को देखकर लगा कि हमारा प्रयास तो लगता है निरर्थक गया। समीक्षात्मक और आलोचनात्मक दृष्टि के बाद भी हम इस तरह की समीक्षा में अपने को पारंगत नहीं बना पाये जैसा कि निर्मला कपिला जी ने उदाहरण दिया है।
उनसे अनुरोध करने के बाद उन्होंने सहृदयता के साथ अपनी समीक्षा को पुनः इस ब्लाग (पुस्तक विमर्श) पर पोस्ट करने की अनुमति दी, उनके प्रति आभार। हमारे मन में एक अप्रत्याशित खुशी भी है कि ब्लाग की पहली पोस्ट समीक्षा के रूप में लगने जा रही है हमारे भतीजे के काव्य-संग्रह की और इस पोस्ट को शब्द मिले हैं प्रतिष्ठित ब्लाग सदस्य आदरणीय निर्मला कपिला जी के।
पुनः निर्मला जी का आभार करते हुए आप सभी से काव्य-संग्रह ‘अनुभूतियाँ’ की समीक्षा पढ़ने का निवेदन है। इस समीक्षा को मूल रूप में निर्मला जी के ब्लाग ‘वीर बहूटी’ पर भी यहाँ क्लिक करके पढ़ सकते हैं।

3 टिप्‍पणियां:

निर्मला कपिला ने कहा…

डा.सेंगर बहुत बहुत बधाई और धन्यवाद जो आपने पुस्तक समीक्षा के लिये एक मंच बनाया है इस से आने वाली पीढी को साहित्य सृजन मे बहुत लाभा भी होगा और विभिन्न पुस्तकों की जानकारी भी । सब से पहली डीपक मशाल की अनुभूतियां की समीक्षा लगने के लिये खुद को सौभाग्यशाली समझती हूँ। धन्यवाद और शुभकामनायें

आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' ने कहा…

sengar ji !
vande mataram.
sameeksha ke liye pustaken aap bhejenge ya main seedhe sameeksha bhejoon?

Devi Nangrani ने कहा…

DR. senger ji aapko tahe dil se badhayi v shukrguzari atta karti hoo is manch ko sahitya ki har vidha ko sthan dene ke liye. Lalak rahti hai ki sodh ke liye hum kisi ek jagah par click karke samagri paayein. Sameekshatmak column ke liye bahut badhayi..
Deepak Mashaal Ji ki anubhution ko sameeksha mein abhivyakt karte hue khoob roshini mein laya gaya hai. meri badhayi is aaaanubhuti ke liye.