07 जनवरी 2011

जिन्दगी से प्यार कर

मत बहाने बना
अपनी असफलता के लिए ;
जो दोष हैं तुझमें
बेझिझक उन्हें स्वीकार कर;
जिन्दगी से प्यार कर.
गिर गया तो क्या हुआ
गिरकर सम्भलते हैं सभी;
एक नया अध्याय खोल
हारी बाजी जीतकर;
जिन्दगी से प्यार कर.
मैं नहीं कुछ भी;
नहीं कर सकता कुछ भी अब कभी;
इस तरह न बैठकर
मौत का इंतजार कर;
जिन्दगी से प्यार कर.

4 टिप्‍पणियां:

Er. सत्यम शिवम ने कहा…

very nice poem...bhut sundar

वन्दना ने कहा…

बहुत सुन्दर उत्साहित करती रचना।

Devi Nangrani ने कहा…

Bahut hi marmic abhivyakti ke liye badhayi ho

shalini kaushik ने कहा…

prastuti ne jingdgi se pyar karna ek bar phir sikha diya.dhanyawad...