02 जुलाई 2009

सुधा भार्गव के मुक्तक


१.कन्धा
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गम मेरी जिन्दगी का अहम हिस्स!
लो एक गम और जुड़ गया
जाने वालों यह बता दो
जिस कंधे पर आंसू बहाए
वह कन्धा क्यों छिन गया
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२ इलाज
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कुछ कह लिया होता
कुछ सुन लिया होता
सदियों का फासला न होता
जुदाई में मिले घावों का
कुछ इलाज तो होता
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३जीवन संध्या
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अपने लिए नहीं ,उनके लिए डरते हैं
अरमान कुचलने वालों के लिए दुआ करते हैं
अपनी बर्बादी का तमाशा जी भर कर देखा
जीवन संध्या में भी उन पर मरते हैं
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४एक बार
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तुम गये शिकवा नहीं
आने का वायदा मगर कर जाते
तुम बिन जी रहे हैं कैसे
एक बार तो देख जाते
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५ दोस्त
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दोस्त का जिक्र जब भी भरी महफिल में होता है
तेरा नाम जवाँ पर और आँखों में बचपन होता है
दोस्ती से मुलाकात ही तेरे मिलन के बाद हुई
बिछुडे ,पर चेहरा तेरा ही दिखाई देता है
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6 इम्तिहान
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पता न था जुदा होना पड़ेगा
प्यार का इम्तिहान देना पड़ेगा
जीने का ढंग सीखा नहीं
बस प्यार करते रहे
अनजाने गरल पीते रहे
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७ कफ़न
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चोट खाई किसी से
किसी को चोट दे गए
चुटकी में मसलकर
कफ़न ओढा गए
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८ आँख मिचौनी
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किस्मत की आँख मिचौनी में
कुछ इस तरह उलझ गये
न उनके हो सके
न अपनी ही बने रहे
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सुधा भार्गव
जे -703 इस्प्रिंग फील्ड,
#17/20, अम्बालीपुरा विलेज,
बेलेंदुर गेट, सरजापुर रोड,
बंगलौर-५६०१०२
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1 टिप्पणी:

Shiv Kumar "Sahil" ने कहा…

दोस्त का जिक्र जब भी भरी महफिल में होता है
तेरा नाम जवाँ पर और आँखों में बचपन होता है
दोस्ती से मुलाकात ही तेरे मिलन के बाद हुई
बिछुडे ,पर चेहरा तेरा ही दिखाई देता है !

koi bishda dost yaad aa gya ...
pad kar dil bar aaya lakin bahut acha laga.