20 मार्च 2009

विरेन भाटिया की कविता - नन्हीं परी

एक छोटी सी परी, हर रात अपने बाबा को तलाशती, बाबा कहानी सुनायेंगे
और कल खिलोने और टोफफी लेन का वादा देके जायेंगे
हर रोज़ उसकी अम्मा, उसके उठने से पहले उसके सिरहाने एक टोफफी, रखती थी
बाबा आए थे छोड़ के गए तेरे लिए, काम पर चले गए आब कहती थी
सालू गुज़र गए नन्ही परी बाबा को बस तस्वीर मैं ही देख पाती थी
उस नन्हीं पर को अपने बाबा की यद् बहुत सताती थी
अम्मा से बहुत पूछती की कब मिलूंगी बाबा से ओ माँ
कभी प्यार से कभी दांत से समझती थी माँ
बाबा चले गए छोड़ के ये जग, नहीं बता पाती थी माँ
हर बार नया झूट नया बहाना बना देती थी उसकी माँ
नन्ही परी हुई बड़ी, पूछा दोस्तो ने की तुम्हारे बाबा हैं कहाँ
माँ से कुछ न पूछा परी ऊपर देखा और कह दिया दोस्तो को, वो हैं वहाँ
नन्ही परी बाबा की जल्दी ही हो गई थी सायानी
करती बातें आइसे जैसे हो वो अपनी अम्मा की नानी
ख़ुद को अम्मा को संभाला नन्ही परी ने और रखा ख्याल
पर कभी न पूछा उसने आमा से वो सवाल
वो नन्हीं परी पराये घर को शोभित कर रही हैं
अपनी आमा और बाबा का नाम वहाँ भी रोशन कर रही हैं
अम्मा अभी भी अपने पुराने गहर मैं बाबा की यादो को गले लगाती हीं
और अपनी नन्ही परी को याद कर रोने लगती हैं


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Biren Bhatia
h4 iit bombay
09833240586

1 टिप्पणी:

maneesha ने कहा…

bahut hi achcha likha hai yun lagta hai jaise meri hi gaatha hai.kripya apni aur rachnaaye bhi prakashit karwaayen